ई-सिगरेट: क्या सेहत के लिए आम सिगरेट से बेहतर

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल तक़रीबन 20 हज़ार लोग ई-सिगरेट के ज़रिए धूम्रपान छोड़ रहे हैं.

पीएचई ने सिफ़ारिश की है कि डॉक्टरों को अपने मरीज़ों को ई-सिगरेट आज़माने की सलाह देनी चाहिए. साथ ही अस्पतालों में ई-सिगरेट बेचने की इजाज़त दी जानी चाहिए.

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पतालों में अलग से ऐसी जगह बनानी चाहिए जहां जाकर लोग ई-सिगरेट पी सकें.

साथ ही लंबे समय तक अस्पताल में रहने वाले मरीज़ों के लिए निजी कमरों में ही ई-सिगरेट पीने की सुविधा देने का सुझाव भी दिया गया है.

पीएचई की रिपोर्ट में कंपनियों को भी अपने यहां ऐसे इंतज़ाम करने की सलाह दी गई है.

क्या है सिगरेट छोड़ने का 'गर्लफ्रेंड फॉर्मूला'?

ई-सिगरेट भी लगाती है जिगर में आग

वेल्स में सरकार ने स्कूल और अस्पताल समेत कुछ जगहों पर ई-सिगरेट पीने पर रोक लगाने की कोशिश की थी. सरकार का तर्क था कि ई-सिगरेट को इस तरह आम करने से लोग वापस धूम्रपान के बारे में सोचने लगेंगे.

लेकिन इंग्लैंड और वेल्स के बीच एकराय न बन पाने की वजह से ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका.

ब्रिटेन में ई-सिगरेट को अभी भी धूम्रपान छुड़ाने के तरीक़े का लाइसेंस नहीं मिला है.

ऐसे में पीएचई को लगता है कि दवा का लाइसेंस लेना ई- सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के लिए "एक आसान रास्ता" हो सकता है.

पीएचई के हेल्थ इम्प्रूवमेंट डायरेक्टर जॉन न्यूटन के मुताबिक़, ''अगर एमएचआरए (चिकित्सा और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों की नियामक एजेंसी) कंपनियों का रास्ता आसान बनाने के लिए कुछ करे तो मदद मिल सकती है.''

हालांकि जानकारों की इस बात पर एक राय नहीं है कि ई-सिगरेट सेहत को कितना नुक़सान पहुंचाती है. पीएचई की रिपोर्ट की समीक्षा करने वाले जानकारों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं.

लेकिन जॉन न्यूटन ज़ोर देकर कहते हैं कि इस बात के ठोस सबूत हैं कि ई-सिगरेट धूम्रपान से कहीं ज़्यादा सुरक्षित है और इसके साथ खड़े व्यक्ति पर भी ना के बराबर असर होता है.

किंग्स कॉलेज लंदन में टोबैको एडिक्शन के प्रोफ़ेसर और रिपोर्ट पर काम करने वाले मुख्य लेखक एन मैकनील का कहना है कि, ये ''चिंता का विषय'' था कि धूम्रपान करने वालों को ''अब भी जानकारी नहीं है'' कि पारंपरिक सिगरेटों का इस्तेमाल कितना हानिकारक है.

मैकनील के मुताबिक़, "जब लोग तम्बाकू वाली सिगरेट पीते हैं तो वे धुएं के 7,000 घटक अपने अंदर ले जाते हैं जिनमें से 70 को कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है. ई-सिगरेट में ये तत्व या तो बहुत कम मात्रा में हैं या हैं ही नहीं. इसलिए हमें विश्वास है कि ई-सिगरेट कम नुक़सान पहुंचाती है."

मैकनील यह भी बताते हैं कि "लोग सिगरेट निकोटिन के लिए पीते हैं. लेकिन कम लोग जानते हैं कि निकोटिन से ज़्यादा नुक़सान नहीं होता. असल नुक़सान होता है ज़हरीले धुएं से जो तंबाकू से होने वाली बीमारियों और मौतों की भी सबसे बड़ी वजह है."

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